26 Oct 2018

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ऐसा ज्ञान की प्राप्ति जो झूठा, निराधार और गलत हो वो ज्यादा खतरनाक होता है उससे अच्छा है की हम अज्ञानी, अशिक्षित या विद्याहीन ही रहे | ...

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ऊच नीच को नही मानती है हमारे देश की भाषाए क्यूकी भारत की भाषाओ में कोई अक्षर कैपिटल या स्माल नही होते है |

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  यदि आप अपनी नजरे सूर्य पर रखेगे तो आपको परिछाहिया कभी भी नही दिखेगी |

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हम अपने जीवन में जो चाहते है उसे चुनने के लिए मुक्त है लेकिन उसके परिणाम से कभी मुक्त नही हो सकते है |

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ये कभी मत सोचना की जो तेज बोलते है वे शक्तिशाली ही हो, और जो धीमे बोलते हो वे कमजोर हो |

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मैंने कभी महान होने के लिए काम नही किया, मैंने तो जो भी काम किया उसे बस सोच कर किया जो भी करना है उसे अपने पूरे योग्यता के साथ करना है | ...

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मैंने कोई तकनीक का इस्तेमाल नही करता हु और न ही मैंने अभिनय का कोई विशेष प्रशिक्षण लिया हु मै जो भी कार्य करता हु वो पूरे मेहनत के साथ ख़ु...

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दुष्ट व्यक्ति का स्वाभाव हमेसा दुसरो के कार्य को बिगाड़ने का ही होता है जिस प्रकार एक वस्त्र काटने वाला चूहा कभी भी अपने पेट भरने के लिए क...

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मै जिन परिस्थितियों से होकर गुजरा हु उस परिस्थिति में मेरा शरीर जिस प्रकार प्रतिक्रिया की है वह किसी रणक्षेत्र से कम नही है |

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यदि आप में लगन, धैर्य, हिम्मत, है तो आप किसी भी विकट परिस्थिति में उसका सामना करते हुए सफलतापूर्वक बाहर निकल कर आगे जा सकते है

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आप जीवित रहने के लिए क्या करते है और आपके जीने का उद्देश्य क्या है इन दोनों में बहुत फर्क है

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एक दिन ये चेहरे बदल जाते है दुनिया बदले या न बदले लेकिन कुछ ऐसे भी है काम जो हमे बताते है की कोई भी काम बड़ा या छोटा नही होता है हमारा दिल...

22 Oct 2018

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मन हीं मनोरथ छांड़ी दे, तेरा किया न होई।   पानी में घिव निकसे, तो रूखा खाए न कोई। भावार्थ: मनुष्य मात्र को समझाते हुए कबीर कहते ह...

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माया मुई न मन मुआ, मरी मरी गया सरीर।   आसा त्रिसना न मुई, यों कही गए कबीर । भावार्थ: कबीर कहते हैं कि संसार में रहते हुए न माया म...

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साधू भूखा भाव का, धन का भूखा नाहिं   धन का भूखा जी फिरै, सो तो साधू नाहिं। भावार्थ: कबीर दास जी कहते कि साधू हमेशा करुणा और प्रेम...

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कबीर सो धन संचे, जो आगे को होय।   सीस चढ़ाए पोटली, ले जात न देख्यो कोय। भावार्थ: कबीर कहते हैं कि उस धन को इकट्ठा करो जो भविष्य म...

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तन को जोगी सब करें, मन को बिरला कोई।   सब सिद्धि सहजे पाइए, जे मन जोगी होइ। भावार्थ: शरीर में भगवे वस्त्र धारण करना सरल है, पर मन...

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कुटिल वचन सबतें बुरा, जारि करै सब छार   साधु वचन जल रूप है, बरसै अमृत धार। भावार्थ: बुरे वचन विष के समान होते है और अच्छे वचन अमृ...

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कबीर तन पंछी भया, जहां मन तहां उडी जाइ।   जो जैसी संगती कर, सो तैसा ही फल पाइ। भावार्थ: कबीर कहते हैं कि संसारी व्यक्ति का शरीर प...

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पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,   ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय। भावार्थ: बड़ी बड़ी पुस्तकें पढ़ कर संसार में कितने...

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साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय,   सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय। भावार्थ: इस संसार में ऐसे सज्जनों की जरूरत है जैसे अनाज साफ...

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तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय,   कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय। भावार्थ: कबीर कहते हैं कि एक छोटे से तिनके क...

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धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,    माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय। भावार्थ: मन में धीरज रखने से सब कुछ होता है। अगर कोई माल...

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माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,   कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर। भावार्थ: कोई व्यक्ति लम्बे समय तक हाथ में लेकर मोती की ...

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जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,   मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान। भावार्थ: सज्जन की जाति न पूछ कर उसके ज्ञान को समझना...

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दोस पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त,   अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत। भावार्थ: यह मनुष्य का स्वभाव है कि जब वह दूसरों के दोष देख...

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जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ,   मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ। भावार्थ: जो प्रयत्न करते हैं, वे कुछ न कुछ वैसे ही पा ही...

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बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि,   हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि। भावार्थ: यदि कोई सही तरीके से बोलना जानता है तो उसे पत...

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अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,   अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप। भावार्थ: न तो अधिक बोलना अच्छा है, न ही जरूरत से ज्...

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                          दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार,   तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार। भावार्थ: इस संसार में ...

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                             कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर,   ना काहू से दोस्ती,न काहू से बैर। भावार्थ: इस संसार में आकर क...

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                    हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,   आपस में दोउ लड़ी-लड़ी  मुए, मरम न कोउ जाना। भावार्थ: कबीर कह...

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                        माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीख   माँगन ते मारना भला, यह सतगुरु की सीख। भावार्थ: कबीर दास जी कहते कि ...

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                      कहत सुनत सब दिन गए, उरझि न सुरझ्या मन।   कही कबीर चेत्या नहीं, अजहूँ सो पहला दिन। भावार्थ: कहते सुनते सब दि...

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                         कबीर लहरि समंद की, मोती बिखरे आई।   बगुला भेद न जानई, हंसा चुनी-चुनी खाई। भावार्थ: कबीर कहते हैं कि समुद्...

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                      जब गुण को गाहक मिले, तब गुण लाख बिकाई।   जब गुण को गाहक नहीं, तब कौड़ी बदले जाई। भावार्थ: कबीर कहते हैं कि ज...

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                          कबीर कहा गरबियो, काल गहे कर केस।   ना जाने कहाँ मारिसी, कै घर कै परदेस। भावार्थ: कबीर कहते हैं कि हे मान...

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                         पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात।   एक दिना छिप जाएगा,ज्यों तारा परभात। भावार्थ: कबीर का कथन है कि जैस...

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                       हाड़ जलै ज्यूं लाकड़ी, केस जलै ज्यूं घास।   सब तन जलता देखि करि, भया कबीर उदास। भावार्थ: यह नश्वर मानव देह ...

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                        जो उग्या सो अन्तबै, फूल्या सो कुमलाहीं।   जो चिनिया सो ढही पड़े, जो आया सो जाहीं। भावार्थ: इस संसार का निय...

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                        झूठे सुख को सुख कहे, मानत है मन मोद।   खलक चबैना काल का, कुछ मुंह में कुछ गोद। भावार्थ: कबीर कहते हैं कि ...

21 Oct 2018

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             ऐसा कोई ना मिले, हमको दे उपदेस।   भौ सागर में डूबता, कर गहि काढै केस। भावार्थ: कबीर संसारी जनों के लिए दुखित होते हु...

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              संत ना छाडै संतई, जो कोटिक मिले असंत   चन्दन भुवंगा बैठिया,  तऊ सीतलता न तजंत। भावार्थ: सज्जन को चाहे करोड़ों दुष्ट...

20 Oct 2018

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शीशा अौर रिशता दोनों हि बङे नाज़ुक होते हैं  दोनों में सिर्फ एक ही फर्क है,  शीशा गलती से टूट जाता है  अौर रिशता गलतफहमियों से ...