21 Nov 2018

ब्रूस ली | जॉन ड्यूई | रॉस पेरो | जॉन बेइज़ | जॉन मेसन गुड के विचार हिंदी में

0 comments

“कर्म सही या गलत नहीं होता है। लेकिन जब कर्म आंशिक, अधूरा होता है, सही या गलत की बात तब सामने आती है।”
~ब्रूस ली
 

स्वत्व (आत्म तत्व) कोई बनी बनाई वस्तु नहीं होती है, कर्म के चयन के परिणाम स्वरूप इसका निरन्तर निर्माण करना पड़ता है।”
~जॉन ड्यूई
 

“वह व्यक्ति कर्मठ नहीं है जो कि यह कहता है कि नदी गंदी है। कर्मठ तो वह व्यक्ति होता है जो कि नदी को सफाई करना शुरु कर देता है।”
~रॉस पेरो
 

“निराशा को काम में व्यस्त रहकर दूर भगाया जा सकता है।”
~जॉन बेइज़
 

“खुशी गतिविधि में निहित होती है, यह एक बहती धारा है, न कि रुका हुआ तालाब।”
~जॉन मेसन गुड