दलाई लामा |चाणक्य के विचार हिंदी में

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“मंदिरों की आवश्यकता नहीं है, न ही जटिल तत्त्वज्ञान की। मेरा मस्तिष्क और मेरा हृदय मेरे मंदिर हैं; मेरा दर्शन दयालुता है।”
~दलाई लामा
 

“यदि आप दूसरों की मदद कर सकते हैं, तो अवश्य करें; यदि वह नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाएं।”
~दलाई लामा
 

“प्रसन्नता कोई पहले से निर्मित चीज नहीं है। यह आप ही के कर्मों से आती है।”
~दलाई लामा
 

“सभी प्रमुख धार्मिक परम्पराओं का मूल संदेश एक ही है – प्रेम, दया, और क्षमा, लेकिन महत्त्वपूर्ण बात यह है कि ये हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा होने चाहियें।”
~दलाई लामा
 

“कोई काम शुरू करने से पहले, स्वयं से तीन प्रश्न पूछिए – मैं यह क्यों कर रहा हूं, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल हो पाऊंगा। जब गहराई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें, तब आगे बढ़ें।”
~चाणक्य